उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण में रिक्त हुए मा0 अध्यक्ष, उपाध्यक्ष (न्या0/प्रशा0) एवं सदस्यगण (न्याय0/प्रशा0) के कुल 13 पदों के चयन के सम्बन्ध में
विधायी अनुभाग-1 की अधिसूचना दिनांक 14 अगस्त, 2017 द्वारा निर्गत उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण (संशोधन) अधिनियम-2017 के माध्यम से उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण-1976 की धारा-3 में निम्नानुसार संशोधन किया गया:-
उ0प्र0 लोक सेवा (अधिकरण) अधिनियम, 1976 की धारा-3 में संशोधन उपधारा (8) में विद्यमान परन्तुक रख दिया जाएगा अर्थात ‘परन्तु कोई अध्यक्ष/उपाध्यक्ष या सदस्य इस रूप में निम्नलिखित आयु प्राप्त करने के पश्चात पद धारण नहीं करेगा:-
(क) अध्यक्ष के मामले में 65 वर्ष की आयु और
(ख) उपाध्यक्ष या किसी सदस्य के मामले में 62 वर्ष की आयु।
(ग) ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) (संशोधन) अधिनियम, 2017 द्वारा यथा संशोधित उपधारा (8) के उपबंध, उक्त अधिनियम के प्रारम्भ होने पर पदधारण करने वाले अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या किसी सदस्य पर लागू होंगे।
(2) उक्त उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण (संशोधन) अधिनियम-2017 को निरस्त किए जाने के सम्बन्ध में मा0 उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ के समक्ष कतिपय रिट याचिकाएं योजित की गयीं, किन्तु मा0 न्यायालय द्वारा विभिन्न तिथियों में हुई सुनवाई के दौरान न तो विधायी अनुभाग-1 की अधिसूचना संख्या- 1546/79-वि-1-17-1(क) 4-2017, दिनांक 14 अगस्त, 2017 द्वारा प्रवृत्त उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण अधिनियम (संशोधन), 2017 को न तो स्थगित किया गया और न निरस्त।
(3) अतः शासन द्वारा इस सम्बन्ध में सम्यक विचारोपरान्त न्याय अनुभाग-8 (लेखा) के कार्यालय-ज्ञाप दिनांक 12 जुलाई, 2019 द्वारा राज्य लोक सेवा अधिकरण में संशोधन अधिनियम-2017 लागू होने के पश्चात कार्यरत रहे लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यगण के रूप पदस्थ 09 अधिकारियों को उनके धारित पद से हटाए जाने के औपचारिक आदेश निर्गत किए जा चुके हैं।
(4) विधायी अनुभाग-1 की अधिसूचना संख्या-1546/79-वि-1-17-1 (क) 4-2017, दिनांक 14 अगस्त, 2017 द्वारा प्रवृत्त उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण अधिनियम (संशोधन), 2017 लागू किए जाने से पूर्व ही राज्य लोक सेवा अधिकरण में 04 पीठासीन अधिकारियों (सदस्यगण) के पद रिक्त हो चुके थे।
(5) इस प्रकार वर्तमान में उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण में अध्यक्ष/उपाध्यक्ष एवं सदस्यगण के समस्त 13 पद रिक्त हैं। इन रिक्त पदों पर नये सिरे से चयन हेतु मा0 मंत्रिपरिषद के विचारार्थ टिप्पणी/प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है।
उ0प्र0 लोक सेवा (अधिकरण) अधिनियम, 1976 की धारा-3 में संशोधन उपधारा (8) में विद्यमान परन्तुक रख दिया जाएगा अर्थात ‘परन्तु कोई अध्यक्ष/उपाध्यक्ष या सदस्य इस रूप में निम्नलिखित आयु प्राप्त करने के पश्चात पद धारण नहीं करेगा:-
(क) अध्यक्ष के मामले में 65 वर्ष की आयु और
(ख) उपाध्यक्ष या किसी सदस्य के मामले में 62 वर्ष की आयु।
(ग) ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) (संशोधन) अधिनियम, 2017 द्वारा यथा संशोधित उपधारा (8) के उपबंध, उक्त अधिनियम के प्रारम्भ होने पर पदधारण करने वाले अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या किसी सदस्य पर लागू होंगे।
(2) उक्त उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण (संशोधन) अधिनियम-2017 को निरस्त किए जाने के सम्बन्ध में मा0 उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ के समक्ष कतिपय रिट याचिकाएं योजित की गयीं, किन्तु मा0 न्यायालय द्वारा विभिन्न तिथियों में हुई सुनवाई के दौरान न तो विधायी अनुभाग-1 की अधिसूचना संख्या- 1546/79-वि-1-17-1(क) 4-2017, दिनांक 14 अगस्त, 2017 द्वारा प्रवृत्त उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण अधिनियम (संशोधन), 2017 को न तो स्थगित किया गया और न निरस्त।
(3) अतः शासन द्वारा इस सम्बन्ध में सम्यक विचारोपरान्त न्याय अनुभाग-8 (लेखा) के कार्यालय-ज्ञाप दिनांक 12 जुलाई, 2019 द्वारा राज्य लोक सेवा अधिकरण में संशोधन अधिनियम-2017 लागू होने के पश्चात कार्यरत रहे लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यगण के रूप पदस्थ 09 अधिकारियों को उनके धारित पद से हटाए जाने के औपचारिक आदेश निर्गत किए जा चुके हैं।
(4) विधायी अनुभाग-1 की अधिसूचना संख्या-1546/79-वि-1-17-1 (क) 4-2017, दिनांक 14 अगस्त, 2017 द्वारा प्रवृत्त उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण अधिनियम (संशोधन), 2017 लागू किए जाने से पूर्व ही राज्य लोक सेवा अधिकरण में 04 पीठासीन अधिकारियों (सदस्यगण) के पद रिक्त हो चुके थे।
(5) इस प्रकार वर्तमान में उ0प्र0 लोक सेवा अधिकरण में अध्यक्ष/उपाध्यक्ष एवं सदस्यगण के समस्त 13 पद रिक्त हैं। इन रिक्त पदों पर नये सिरे से चयन हेतु मा0 मंत्रिपरिषद के विचारार्थ टिप्पणी/प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है।
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