वैश्विक समुदाय को आतंकवाद, भ्रष्टाचार को खत्म करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक साथ आना चाहिए : उप-राष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि विश्व आज तीन मुख्य चुनौतियों आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और भ्रष्टाचार का सामना कर रहा है और उससे निपटने के लिए आज वैश्विक समुदाय को एकजुट होने की जरूरत है।
रविवार को गांधीनगर में 9 वें वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन था और सभी देशों को इससे निपटने में एक साथ आने का आज मैं फिर से आग्रह करता हूं। इसी तरह, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को भी कम करने के लिए सभी को हाथ मिलाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कि भ्रष्टाचार पूरी दुनिया की समस्या है। उन्होंने सभी देशों के आर्थिक भगोड़ों के प्रत्यार्पण और अवैध बैंक खातों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सहमति बनाए जाने का आग्रह किया।
यह देखते हुए कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा किए गए सुधारों ने भारत को विश्व में निवेश के शीर्ष स्थान पर पहुंचा दिया है, उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के लिए रियल एस्टेट से लेकर स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत द्वारा पेश की जाने वाली विशाल क्षमता का उपयोग करने का यह सही समय है।
उन्होंने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का सितारा आज बुलंदी पर है। भारतीय उपभोक्ता बाजार में विशाल क्षमता के कारण वैश्विक निगम भारत के प्रति तेजी से आकर्षित हो रहे थे, जो कि अनुकूल जनसांख्यिकी और बढ़ती आय से प्रेरित हैं। आज, भारत दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश है।
भारत विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए 77 वें स्थान पर पहुंच गया है। विमुद्रीकरण, जीएसटी, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, पुराने कानूनों को निरस्त करना, सड़क और हवाई कनेक्टिविटी पर जोर देने, बुनियादी ढाँचे, आवास और कृषि क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने जैसे उपायों से अर्थव्यवस्था को गति प्राप्त करने में मदद मिली है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ क्षेत्रों में एफडीआई के माध्यम से 100 प्रतिशत विदेशी भागीदारी के लिए खोलने से अर्थव्यवस्था को गति मिली है।
विश्व बैंक के नवीनतम पूर्वानुमान का हवाला देते हुए, श्री नायडु ने कहा कि भारत विश्व में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
भारत के विकास पर विश्वास जताते हुए, उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार जल्द ही 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंच जाएगा और यह 2030 तक दोगुना होकर 10 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा।
समावेशी प्रगति और समृद्धि के लिए भारत के सहकारी और प्रतिस्पर्धी अद्वितीय मॉडल की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने निवेशकों को आकर्षित करने और औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा की प्रशंसा की।
उन्होंने निवेश के अवसरों की पेशकश करने के लिए राज्यों के बीच एक उदाहरण के रूप में उभरने के लिए गुजरात सरकार की सराहना की।
श्री नायडु वे कहा कि भारत और गुजरात का परिवर्तन भारत को व्यापार करने और व्यापार के लिए एक पसंदीदा स्थान के रूप में वैश्विक मानचित्र पर उभरना हमारे मजबूत संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का तीन शब्दों का मंत्र, “सुधार, प्रदर्शन और रूपांतरण” सभी क्षेत्रों में भारत को ऊंचाइयों पर ले जाकर परिवर्तन लाने का मूल मंत्र है।
विकसित देशों से भारत को प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में नेतृत्व करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, “समय के साथ फिर से हमने साबित कर दिया है कि हम एक जिम्मेदार राष्ट्र हैं। हम सुरक्षित कॉपीराइट कानूनों के लिए पारिस्थितिकी तंत्र बनाएंगे, ताकि हमारे साथ प्रौद्योगिकी साझा करने में किसी देश को कोई हिचकिचाहट न हो। हमारी प्रतिभा इस उत्पाद को नवीन तरीकों और समाधानों के साथ आगे लाने में मदद करेगी।”
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय कंपनियाँ वस्तुओं के निवेश, बिक्री और निर्यात के लिए नए बाजारों की तलाश में हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि हम व्यापार और निवेश से अलग हटकर कुछ करना चाहते हैं। हम राष्ट्रों के बीच लंबे समय तक चलने वाले संबंध बनाना चाहते हैं जो विश्वास और सहयोग को और भी मजबूत करे। यह विशेष रूप से आज के वैश्विक माहौल में आर्थिक,सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में मुद्दों का समाधान करने के लिए सर्वोपरि होगा जो बहुत हद तक प्रतिकूल भी है।
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