मंत्रिमंडल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग पर भारत और इंडोनेशिया के बीच..
दिल्ली: 9 अगस्त, 2018 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग पर भारत और इंडोनेशिया के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी है।
इस एमओयू पर मई 2018 को नई दिल्ली में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने और मई 2018 में जकार्ता में इंडोनेशिया की ओर से वहां के अनुसंधान, प्रौद्योगिकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री मोहम्मद नासिर ने हस्ताक्षर किए थे। इस एमओयू पर हस्ताक्षर होने से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध के लिए एक नया अध्याय खुलेगा। इससे दोनों पक्षों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पारस्परिक हितों को साधने के लिए पूरक ताकत मिलेगी।
इस एमओयू का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समानता एवं पारस्परिक लाभ का आधार पर भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके हितधारकों में भारत और इंडोनेशिया के वैज्ञानिक संगठनों के शोधकर्ता, शिक्षा, आरएण्डडी प्रयोगशाला एवं कंपनियां शामिल हैं। तत्काल सहयोग के लिए पहचान किए गए संभावित क्षेत्रों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, समुद्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान (जैव प्रौद्योगिकी, कृषि एवं जैव चिकित्सा विज्ञान), ऊर्जा अनुसंधान, जल प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन, आतंरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं एप्लीकेशन, जियोस्पेशियल इंफॉर्मेशन एवं अप्लाइड केमिस्ट्री शामिल हैं।
इस एमओयू पर मई 2018 को नई दिल्ली में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने और मई 2018 में जकार्ता में इंडोनेशिया की ओर से वहां के अनुसंधान, प्रौद्योगिकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री मोहम्मद नासिर ने हस्ताक्षर किए थे। इस एमओयू पर हस्ताक्षर होने से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध के लिए एक नया अध्याय खुलेगा। इससे दोनों पक्षों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पारस्परिक हितों को साधने के लिए पूरक ताकत मिलेगी।
इस एमओयू का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समानता एवं पारस्परिक लाभ का आधार पर भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके हितधारकों में भारत और इंडोनेशिया के वैज्ञानिक संगठनों के शोधकर्ता, शिक्षा, आरएण्डडी प्रयोगशाला एवं कंपनियां शामिल हैं। तत्काल सहयोग के लिए पहचान किए गए संभावित क्षेत्रों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, समुद्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान (जैव प्रौद्योगिकी, कृषि एवं जैव चिकित्सा विज्ञान), ऊर्जा अनुसंधान, जल प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन, आतंरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं एप्लीकेशन, जियोस्पेशियल इंफॉर्मेशन एवं अप्लाइड केमिस्ट्री शामिल हैं।
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